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Tuesday, 3 July 2018

जलेबी खिलाओ

रांची के अल्बर्ट एक्का चौक के पास एक व्यक्ति ठेले पर जलेबी बेच रहा था। तभी एक सिपाही आया और बोला-हटाओ ठेला। रोड जाम हो रहा है। जहां मन करता है वहीं ठेला लगा देते हैं। जैसे बाप की सड़क हो।...यह फरमान जारी कर वह आगे बढ़ गया।   कुछ देर बाद दूसरा सिपाही आया और बोला-आराम से बेचो। कोई परेशान करे तो मुझे बताओ। जलेबी खिलाओ।
ठेलेवाले ने कहा-अभी एक सिपाही जी ठेला हटाने को बोल गए हैं।
-फिर आए तो कह देना तिवारी जी ठेला यहीं रखने को बोल गए हैं। किसी के कहने पर मत हटाओ। जलेबी खिलाओ।
ठेलेवाले ने कड़ाही से ताज़ा जलेबी छन्ने से निकाला परात में रखा और सबसे पहले एक दोने में निकालकर सिपाही को दिया।  इसके बाद ग्राहकों को निपटाने में व्यस्त हो गया। सिपाही जलेबी का दोना लेकर आगे बढ़ गया जहां पहला सिपाही उसके आने का इंतजार कर रहा था। इसके बाद दोनों आराम से गरमा-गरम जलेबी का स्वाद लेने लगे। ठेलेवाले का उनकी ओर ध्यान नहीं गया वह अपने ग्राहकों की मांग पूरी करने में व्यस्त रहा।

अब वापसी का कोई रास्ता नहीं

भारत की संस्कृति अपनी जरूरत भर धनार्जन और संचय की रही है। हम प्राकृतिक संसाधनों का भी उतना ही दोहन करते रहे जितने की क्षतिपूर्ति वह स्वयं क...